मुंबई लोकल ट्रेन हादसे और यात्रियों की समस्याएँ
मुंबई लोकल ट्रेन हादसे और यात्रियों की समस्याएँ
हालिया हादसे और डेटा
9 जून 2025, मumbra-दिवा हादसा: मुंबई के मumbra और दिवा स्टेशनों के बीच एक भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन से 4 यात्रियों की मौत और 9 घायल हो गए। कारण: दो विपरीत दिशा में जा रही ट्रेनों के फुटबोर्ड पर लटके यात्रियों का आपस में टकराना। रेलवे ने इसे अत्यधिक भीड़ का परिणाम बताया।
2024 में मौतें और चोटें: 2024 में मुंबई के उपनगरीय रेल नेटवर्क पर 2,468 मौतें और 2,697 चोटें दर्ज की गईं, जो 2023 के 2,590 मौतों और 2,441 चोटों से थोड़ा कम है। सबसे बड़ा कारण: ट्रैक पार करना (1,151 मौतें) और ट्रेन से गिरना।
पिछले 20 वर्षों का रिकॉर्ड: 2005 से जुलाई 2024 तक, मुंबई के उपनगरीय रेल नेटवर्क पर 51,802 मौतें हुईं, जिनमें से 29,321 सेंट्रल रेलवे और 22,481 वेस्टर्न रेलवे पर थीं। कल्याण, ठाणे, वसई, और बोरीवली स्टेशन सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।
2023 में विशिष्ट डेटा: 2,590 मौतें, जिनमें 1,277 ट्रैक पार करने और 590 ट्रेन से गिरने के कारण। 121 आत्महत्याएँ और 529 प्राकृतिक कारणों से मौतें भी दर्ज की गईं।
मुंबई लोकल ट्रेन यात्रियों की समस्याएँ
अत्यधिक भीड़:
मुंबई की लोकल ट्रेनें प्रतिदिन 70 लाख से अधिक यात्रियों को ढोती हैं। एक 12-कोच वाली ट्रेन की क्षमता 1,200 बैठने और 1,800 खड़े होने की है, लेकिन पीक आवर्स में यह 4,000 से अधिक यात्रियों को ले जाती है। इससे फुटबोर्ड पर लटकना और दुर्घटनाएँ आम हैं।
भीड़ के कारण यात्रियों का ट्रेन से गिरना और प्लेटफॉर्म-ट्रेन के बीच गैप में फंसना आम है।
ट्रैक पार करने की समस्या:
अनधिकृत ट्रैक पार करना सबसे बड़ा कारण है, 2024 में 1,151 मौतें। फुट ओवरब्रिज की कमी और लंबी दूरी के कारण लोग जोखिम उठाते हैं।
रेलवे ट्रैक्स के पास बस्तियाँ और अवैध अतिक्रमण इस जोखिम को बढ़ाते हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी:
प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच गैप के कारण दुर्घटनाएँ, खासकर बुजुर्गों और अक्षम लोगों के लिए।
आपातकालीन चिकित्सा कक्ष (EMR) रात में बंद रहते हैं, जिससे घायलों को तुरंत मदद नहीं मिलती।
ट्रैक पर कचरा और बरसात में जलभराव से ट्रेनों में देरी और दुर्घटनाएँ बढ़ती हैं।
सुरक्षा उपायों की कमी:
गैर-एसी ट्रेनों में ऑटोमैटिक डोर क्लोजर की कमी। रेलवे ने जनवरी 2026 तक नए गैर-एसी ट्रेनों में यह सुविधा शुरू करने का वादा किया है।
ट्रेनों की संख्या और फ्रीक्वेंसी बढ़ाने में देरी, जिससे भीड़ कम नहीं होती।
सुझाए गए समाधान
साइक्लिक टाइमटेबल: एक्टिविस्ट समीर जवेरी ने सुझाव दिया कि साइक्लिक टाइमटेबल से भीड़ 30-40% कम हो सकती है और यात्रा समय 20-25% कम हो सकता है।
ऑटोमैटिक डोर क्लोजर: सभी नई ट्रेनों में यह सुविधा अनिवार्य करने की योजना।
इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार: अधिक फुट ओवरब्रिज, एस्केलेटर, और ट्रैक के किनारे दीवारें बनाने की जरूरत।
जागरूकता अभियान: यात्रियों को ट्रैक पार करने और फुटबोर्ड पर लटकने के खतरों के बारे में शिक्षित करना।
निष्कर्ष
मुंबई की लोकल ट्रेनें शहर की जीवनरेखा हैं, लेकिन अत्यधिक भीड़, अपर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर, और सुरक्षा उपायों की कमी के कारण हर दिन औसतन 7 मौतें होती हैं। तत्काल सुधार और निवेश के बिना यह संकट बना रहेगा।
स्रोत:
Hindustan Times, Times of India, India Today, The Hindu, Scroll.in, News18, Moneylife.in
X पोस्ट्स द्वारा @CNNnews18, @scroll_in, @nabilajamal_, @Shyamsundarak6

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