टेम्बा बावूमा: छोटा कद, बड़ा कारनामा

पिच पर लचकते हुए, हर रन के लिए जूझते टेम्बा बावूमा के चेहरे पर एक अजीब-सी शांति थी। उसकी आँखें चीख-चीखकर कह रही थीं—अभी बहुत कुछ बाकी है, मंज़िल को और मेहनत चाहिए। चोटिल पैर के बावजूद, वह मैदान पर ऐसा डटा था, मानो हार उसका रास्ता रोकने की हिम्मत ही न कर सके।
जो कोई उसे साढ़े तीन घंटे तक बल्ला थामे देखता, वह यह नजारा जिंदगी भर न भूलता। बावूमा जब खेल रहा था, तो केपटाउन की तंग गलियों में, लांगा की काली बस्ती के उन बच्चों की रूह भी उसके साथ थी, जो फटे हुए जूतों और पुरानी गेंदों के साथ सूरज डूबने तक क्रिकेट खेलते थे। वहाँ कोई पक्का मैदान नहीं था। गलियों को बच्चों ने अपने हिसाब से नाम दिए—सबसे टेढ़ी-मेढ़ी गली थी कराची, और सबसे चिकनी थी लॉर्ड्स।
कल असली लॉर्ड्स में एक नया सूरज उगा। आँकड़े चिल्लाते हैं कि 27 सालों में बार-बार, दक्षिण अफ्रीका जीत के करीब पहुँचकर भी खाली हाथ रह गया। क्रॉन्जे, शॉन पॉलक, ग्रीम स्मिथ, डिविलियर्स—इतने सारे दिग्गजों की कप्तानी में भी हर बार कुछ ऐसा हो जाता कि जीत फिसल जाती।
कल वह बदकिस्मती टूटी। दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को धूल चटाकर क्रिकेट की सबसे बड़ी ट्रॉफी अपने नाम कर ली। चार दिन तक मैदान पर टकराने वाले 22 खिलाड़ियों में बावूमा कद में सबसे छोटा था—पाँच फुट चार इंच, जब बाकी सब छह फुट के करीब। जब उसे कप्तानी दी गई, तो दुनिया ने उसका मज़ाक उड़ाया। नासिर हुसैन जैसे लोगों ने उसे ‘कोटे’ का कप्तान कहकर खारिज किया। पर यह वही बावूमा था, जिसने अपने देश के लिए पहली अश्वेत सेंचुरी ठोकी थी और दो दशकों से सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में गिना जाता था।
लंबाई का मज़ाक, काबिलियत पर सवाल—वह हर ताने को चुपचाप सहता रहा। ग्यारह साल तक उसने हर आलोचना को जवाब अपने बल्ले से दिया।
उसकी दादी ने उसे टेम्बा नाम दिया था—उनकी ज़ुबान में इसका मतलब है आस। वह अपने घर की औरतों का दुलारा था, जिसके लिए उनकी आँखों में हमेशा एक चमक थी कि यह लड़का कुछ अनोखा करेगा। इस मैच में, चोट के बावजूद, बावूमा मैदान पर खड़ा रहा। उसे अपनी टीम का भरोसा, अपनी मेहनत का वादा, और अपनी माँ की खामोश दुआओं का मान रखना था।
कल जब उसकी कप्तानी में जीत हुई, तो सारी दुनिया ने सलाम किया। जीत के बाद वह न उछला, न चिल्लाया। बस, हथेलियों से चेहरा छिपाकर खड़ा रहा, जैसे अपनी नम आँखों को दुनिया की नज़रों से बचाना चाहता हो।
सबसे छोटा कद, पर सबसे बड़ा हौसला। उसने कोई चमत्कार नहीं किया, बस अपने हिस्से का काम पूरी शिद्दत से किया—बिना हल्ले, बिना शिकवे।
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