रूस-पाकिस्तान सहयोग और भारत: चिंता की आवश्यकता नहीं
रूस और पाकिस्तान के बीच कराची में एक नए स्टील प्लांट के लिए समझौता हुआ है, जो 2015 से बंद पड़े सोवियत-निर्मित पाकिस्तान स्टील मिल्स को पुनर्जनन देगा। यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान के स्टील आयात को 30% तक कम कर सकता है, जिससे उसका 2.6 बिलियन डॉलर का आयात बिल घटेगा। कुछ लोग इसे रूस-पाकिस्तान निकटता का संकेत मानकर भारत के लिए चिंताजनक बता रहे हैं। लेकिन भू-राजनीतिक समीकरणों और ऐतिहासिक संदर्भों को देखते हुए भारत को इससे घबराने की जरूरत नहीं है।
ऐतिहासिक संदर्भ
सोवियत युग में, 1960-70 के दशक में, सोवियत संघ ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता दी थी, जिसमें यही स्टील मिल्स शामिल थी। फिर भी, भारत-सोवियत संबंध मजबूत रहे। शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ ने कश्मीर मुद्दे पर भारत का समर्थन किया और संयुक्त राष्ट्र में कई प्रस्तावों को वीटो किया। आज भी रूस भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देता है, जैसा कि S-400 वायु रक्षा प्रणाली और ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति से स्पष्ट है।
आर्थिक तुलना
2023 में रूस-पाकिस्तान का द्विपक्षीय व्यापार मात्र 1 अरब डॉलर था, जबकि 2024 में भारत-रूस व्यापार 66 अरब डॉलर तक पहुंचा। तेल को हटाने के बाद भी भारत-रूस व्यापार कहीं अधिक है। रूस के लिए भारत एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है। स्टील प्लांट जैसे प्रोजेक्ट्स रूस की आर्थिक जरूरतों और पश्चिमी प्रतिबंधों के जवाब में उठाए गए कदम हैं, न कि भारत के खिलाफ रणनीति।
अफगानिस्तान और चीन का कारक
अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद रूस, चीन, और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक सहयोग बढ़ा है। रूस के लिए मध्य एशिया में स्थिरता महत्वपूर्ण है, जिसमें पाकिस्तान की भूमिका अहम है। साथ ही, रूस-चीन निकटता, विशेष रूप से बेल्ट एंड रोड पहल के कारण, रूस को पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। भारत ने BRI का विरोध किया है, खासकर क्योंकि इसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर शामिल है।
भारत की कूटनीति
भारत को इस समझौते से चिंतित होने के बजाय अपनी कूटनीति को मजबूत करना चाहिए। भारत-रूस रक्षा सहयोग, जैसे S-400 और संयुक्त सैन्य अभ्यास, मजबूत है। रियायती रूसी तेल और उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा जैसे प्रोजेक्ट्स आर्थिक संबंधों को गहरा रहे हैं। भारत को आतंकवाद-रोधी सहयोग को और बढ़ाना चाहिए, विशेष रूप से हाल के पहलगाम जैसे हमलों के संदर्भ में। QUAD जैसे गठबंधनों के माध्यम से भारत रूस-चीन-पाकिस्तान गठजोड़ का मुकाबला कर सकता है।
निष्कर्ष
रूस-पाकिस्तान स्टील प्लांट समझौता एक आर्थिक कदम है, जो भारत-रूस संबंधों को प्रभावित करने की संभावना नहीं रखता। भारत को धैर्य और रणनीतिक कूटनीति के साथ अपनी वैश्विक स्थिति मजबूत करनी चाहिए। विदेश नीति को घरेलू राजनीति से अलग रखकर और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देकर भारत इस संक्रमण काल में स्थिरता बनाए रख सकता है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें