अनलाइन ठगी के शिकार होते समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े लोग, और जानकारी की कमी
मेरी माँ, शांति देवी, एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। गाँव की गर्भवती महिलाओं और बच्चों की सेहत का ख्याल रखना, पोषण सुनिश्चित करना, उनका रोज़ का काम है। माँ कहती हैं, "ये काम नौकरी नहीं, ज़िम्मेदारी है।" लेकिन पिछले हफ्ते, एक साइबर ठग ने उनकी इस ज़िम्मेदारी को निशाना बनाया। मैं इस कहानी को अपने ब्लॉग में साझा कर रहा हूँ, ताकि लोग सतर्क रहें।
कहानी की शुरुआतउस दिन माँ आंगनवाड़ी सेंटर से लौटीं, तभी उनके फोन पर एक कॉल आया। कॉलर ने खुद को भोपाल का "वरिष्ठ अधिकारी" बताया। उसने कहा, "शांति जी, आपने पोषण ट्रैकर ऐप में गलत डेटा अपलोड किया है। आपके खिलाफ कार्यवाही होगी। आपका सेंटर बंद हो सकता है।" माँ घबरा गईं। आंगनवाड़ी उनके लिए गाँव की सेवा का ज़रिया है।ठग का जालउस "अधिकारी" ने माँ से पोषण ट्रैकर ऐप का पिन नंबर माँगा। माँ को लगा कि शायद कोई तकनीकी जाँच हो रही है। अनजाने में उन्होंने पिन बता दिया। इसके बाद उसने ऐप में दर्ज कुछ लाभार्थियों के नाम और नंबर लिए और कहा कि वह "जाँच" के लिए उनसे बात करेगा। कॉल खत्म होने के बाद माँ ने मुझे फोन किया और सारी बात बताई। मैंने तुरंत कहा, "माँ, आपको कोई डिटेल्स नहीं देनी थीं। मैंने पहले भी बताया था कि फ्रॉड कॉल आ सकती हैं, अलर्ट रहना है।" लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।ठगी का खुलासाअगले दिन गाँव में हंगामा मच गया। लाभार्थी सुनीता दीदी ने बताया कि उन्हें एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने कहा, "आपके पोषण खाते में गलती हुई है। पैसे वापस करने होंगे, वरना केस दर्ज होगा।" डर के मारे सुनीता दीदी ने 10,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए। दो अन्य महिलाओं के साथ भी ऐसा ही हुआ। कुल मिलाकर, ठग ने 25,000 रुपये की ठगी कर ली।पुलिस की कार्रवाई और जागरूकतामाँ ने तुरंत मुझे बताया, और हमने स्थानीय पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मामला दर्ज किया और साइबर सेल को जाँच सौंपी। माँ ने आंगनवाड़ी सेंटर में एक जागरूकता सत्र आयोजित किया, जिसमें गाँव वालों को साइबर ठगी के तरीकों के बारे में बताया। पुलिस ने सलाह दी कि कोई भी अनजान कॉलर को व्यक्तिगत जानकारी, पिन, या ओटीपी न दें। माँ ने गाँव की हर महिला को समझाया, "अगर कोई डराए या जल्दी पैसे माँगे, पहले पुलिस से पूछो।"सबकइस घटना ने माँ को सतर्क रहना सिखाया। वो अब हर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को सलाह देती हैं कि पोषण ट्रैकर ऐप का इस्तेमाल सावधानी से करें और संदिग्ध कॉल को तुरंत पुलिस को बताएँ। मैं भी माँ को याद दिलाता रहता हूँ कि मेरी बात ध्यान से सुनें, क्योंकि साइबर ठग नए-नए तरीके अपनाते हैं।मेरी अपीलमैं इस कहानी को अपने ब्लॉग में इसलिए साझा कर रहा हूँ, क्योंकि साइबर ठग हमारी अनजान गलतियों का फायदा उठाते हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, जो गाँव की रीढ़ हैं, उनके साथ ऐसी ठगी होना गलत है। आइए, जागरूकता फैलाएँ। अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है, तो अपनी कहानी साझा करें और पुलिस को सूचित करें।सतर्क रहें, सुरक्षित रहें

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